बवासीर क्या है। और इसके घरेलू उपचार क्या है।

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बवासीर क्या है। और इसके घरेलू उपचार क्या है। 

piles medicine
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बवासीर को piles या  Hemorrhoids भी कहा जाता है। बवासीर एक ऐसी बीमारी है। जो बेहद तकलीफ देती हैं। इसमें गुदा के अदंर और बाहर तथा मलाषय के निचले हिस्से में सूजन आ जाती है।

 इसकी वजह से गुदा के अन्दर और बाहर या किसी एक जगह पर मस्से बन जाते है। मस्से कभी अन्दर रहते है। तो कभी बाहर आ जाते है। 

करीब फीसदी लोगों को उम्र के किसी न किसी पड़ाव में बवासीर की समस्या होती है। रोगी को सही समय पर पाइल्स का इलाज कराना बेहद जरूरी होता है।

 समय पर बवासीर का उपचार नहीं कराया गया तो तकलीफ काफी बढ़ जाती है। यह एक अनुवांषिक समस्या भी है। यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही हो तो इससे दूसरें व्यक्ति को होने की आंषका रहती है।

 बहूत पुराना होने पर यह भगन्दर का रूप धारण कर लेता है। जिसे फिस्टूला भी कहते है। इसमें असहाय जलन एवं पीड़ा होती है।

बवासीर दो प्रकार की होती है। जो ये है

खूनी बवासीर में किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती है। इसमें मलत्याग करते समय खून आता है। इसमें गुदा के अन्दर मस्से हो जाते है। मलत्याग के समय खून मल के साथ थोड़ा थोड़ा टपकता है। या पिचकारी के रूप में आने लगता है।

बादी बवासीर

बदी बवासीर में पेट की समस्या अधिक रहती है। कब्ज एवं गैस की समस्या बनी ही रहती हैं इसके मस्सों में रक्तस्त्राव नहीं होता। यह मस्से बाहर आसानी से देखे जा सकते है। इनमें बार बार खुजली एवं जलन होती है। शुरूआती अवस्था में यह तकलीफ नहीं देते है लेकिन लगातार अस्वस्थ खान-पान और कब्ज रहने से यह फूल जाते है। इनमें खून जमा हो जाता है। और सूजन हो जाती है।
इसमें भी असहनीय पीड़ा होती है और रोगी दर्द से छटपटाने लगता है। मलत्याग करते समय और उसके बाद भी रोगी को दर्द बना रहता है। वह स्वस्थ तरह से चल फिर नहीं पाता और बैठने में भी तकलीफ महसूस करता है। इलाज कराने से यह समस्या ठीक हो जाती है।

बवासीर होने के लक्षण

 कई बार बवासीर यदि गंभीर अवस्थ में ना पहुचां हो तो यह 4-5 दिनों में अपने आप ही ठीक हो जाता है। लेकिन रोग बढ़ने पर ये लक्षण देखें जा सकते है।
 गुदा के आस-पास कठोर गांठ जैसी महसूस होती है। इसमें दर्द रहता है। तथा 

खून भी आ सकता है।
 शौच के बाद भी पेट साफ ना होने का आभास होना
 शौच के वक्त जलन के साथ लाल चमकदार खून का आना।
 शौच के वक्त अत्यधिक पीड़ा होना।
गुदा के आस-पास खुजली एवं लालीपन व सूजन रहना।
 शौच के वक्त म्यूकस का आना।,
 बार-बार मल त्यागने की इच्छा होना लेकिन त्यागते समय मल न निकलना।

बवासीर होने के कारण

बवासीर होने के कारण

बवासीर होने के कारण

 कुछ व्यक्तियों को अपने रोजगार की वजह से घंटे खड़े रहना पड़ता है। जैसे बस कंडक्टर, ट्रैफिक पुलिस इत्यादि। इसके साथ ही जिन्हें भारी वनज उठाना पड़ता है। इन लोगो को बवासीर से पीड़ित होने की अधिक संभावना रहती है।
 कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा एवं कठोर होता है। जिसकी वजह से व्यक्ति को मलत्याग करने में कठिनाई होती है। काफी देर तक उकडू बैठे रहना पड़ता है। इस कारण से वहां की रक्तवाहिनियों पर जोर पड़ता है। और वह फूलकर लटक जाती है। जिन्हें मस्सा कहा जाता है।
 अधिक तला एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन करना।
 शौच ठीक से ना होना।
 फाइबर युक्त भोजन का सेवन न करना।
 महिलाओं में प्रसव के दौरान गुदा क्षेत्र पर दबाव पड़ने से बवासीर होने का खतरा रहता है।
 आलस्य या शारीरिक गतिविधि कम करना।
 धूम्रपान और शराब का सेवन
 अवसाद।

बवासीर के इलाज के लिए घरेलू नुस्खे

आप बवासीर के घरेलू इलाज के लिए ये उपाय कर सकते है।

एलोवेरा के प्रयोग से बवासीर का इलाज

एलोवेरा के सूलनरोधक और चिकित्सकीय गुणों से बवासीर की जलन कम हो जाती है। और कब्ज की समस्या नहीं होती। यह आंतरिक और बाहय दोनो प्रकार के पाइल्स के इलाज में लाभदायक है। गुदा के बाहर के मस्सों में एलोवेरा जेल लगाएं। यह जलन और खुजली को शांत करता हेै। एलोवेरा के 200-250 ग्राम गूदे को खाएं इससे कब्ज नहीं होगी और मलत्यागने में आसानी होगी।

सेब का सिरका

सेब का सिरका अपने कषाय गुणों के कारण रक्तवाहिनियों को सिकोड़ने में मदद करता है। खूनी बवासीर में एक गिलास पानी में सेब के सिरके का एक चम्मच डालकर दिन में दो बार पिएं। बादी बवासीर में सेब के सिरके में रूई भिगोकर गुदा में रखें। इससे जलन और खुजली से राहत मिलेगी।

जैतून के तेल का इस्तेमाल

जैतून के तेल में सूजन ठीक करने वाले गुण होते है। यह रक्तवाहिकाओं में आई सूजन को कम करता हैं। जैतून के तेल को बादी बवासीर के मस्सों पर लगाएं।

नारियल का उपयोग कर बवासीर मे लाभ


नारियल का उपयोग कर बवासीर मे लाभ
नारियल का उपयोग कर बवासीर मे लाभ


नारियल की जटाओं को जलाकर राख या भस्म बना लें। इसे ताजे मठे में मिलाकर सुबह खाली पेट नियमित रूप से पिएं। अंजीर खाने से बवासीर रोग में लाभ तीन अंजीर एक गिलास पानी में भिगों दें। सुबह खाली पेट इसका  सेवन कर इस पानी को भी पिएं।

जीरे का प्रयोग

 

बादी बवासीर में दर्द और जलन होने पर जीरे के दानो को पानी के साथ पीसकर लेप बना लें। इसे मस्सों वाली जगह पर लगाएं।
खूनी बवासीर में जीरे को भूनकर मिश्री के साथ पीस लें। इसे दिन में 2-3 बार 1-2 ग्राम की मात्रा में मठे के साथ लें।

नींबू के इस्तेमाल से पाइल्स का घरेलू इलाज

नींबू के रस में अदरक और शहद मिाकर सेवन करें। इससे पाइल्स में फायदा पहुँचता है।

अजवायन के सेवन से पाइल्स का इलाज

अजवायन बवासीर रोग में अमृत के समान है। एक गिलास छाछ में एक चैथाई अजवायन पाउडर और एक चम्मच काला नमक मिलाकर रोजाना दोपहर के खाने में सेवन करें। यह बवासीर से आराम पाने का सबसे अच्छा घरेलू उपचार है।

पपीता से उपचार

रात के भोजन में पपीता खाएं। इससे कब्ज नहीं होगी। इससे मल त्याने के समय होने वाली पीड़ा नहीं होगी।

बवासीर में परहेज

 अगर आप पाइल्स का इलाज करवा सकते है। या बवासीर से पीड़ित है। तो इन चीजो का परहेज करना बहूत जरूरी है।
 जंक-फूड
 तला भूना एवं मिर्च मसाले युक्त भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।

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